“सिंचाई विभाग का कागजी खेल: फाइलों में बहा पानी, खेत रह गए प्यासे”
"15 साल का इंतजार, मलबे में तब्दील नहर; किसानों का हक डकार रहे सिंचाई विभाग के 'कुंभकर्ण'"
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: कागजों पर दौड़ रही ‘सरयू नहर’, हकीकत में बूंद-बूंद को तरस रहे किसान
ब्यूरो: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- सिंचाई विभाग की ‘कुंभकर्णी नींद’ और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सैकड़ों एकड़ फसल; अब आर-पार की जंग की तैयारी
- “बस्ती में फूटा किसानों का आक्रोश: नहर में पानी नहीं तो डीएम कार्यालय का होगा घेराव”
- “जमीन भी गई और फसल भी सूखी, सरयू नहर परियोजना बनी किसानों के लिए ‘सफेद हाथी'”
- “बस्ती ब्रेकिंग: सिंचाई के नाम पर करोड़ों का ‘घपला’, झाड़ियों में गुम हुई सरयू नहर”
बस्ती/रुधौली।। उत्तर प्रदेश सरकार जहाँ एक ओर किसानों की आय दोगुनी करने का दम भरती है, वहीं बस्ती मंडल के सिंचाई विभाग के अधिकारी सरकार के इन दावों की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। मामला रुधौली तहसील क्षेत्र के सरयू नहर परियोजना का है, जहाँ विभाग ने ‘कागजी सिंचाई’ का ऐसा करिश्मा कर दिखाया है कि हकीकत में किसानों के हाथ सिर्फ धूल और निराशा लगी है।

15 साल का इंतजार, सिर्फ मिला धोखा
बता दें कि रुधौली क्षेत्र के दर्जनों गाँवों के किसानों ने इस उम्मीद में अपनी उपजाऊ सैकड़ों एकड़ जमीन नहर निर्माण के लिए दे दी थी कि सूखे के दिनों में उनकी फसलें लहलहाएंगी। लेकिन पिछले 15 वर्षों से यह नहर केवल एक ‘सफेद हाथी’ साबित हुई है। नहर का निर्माण हुए डेढ़ दशक बीत गए, मगर आज तक खेत की मेड़ तक पानी की एक बूंद नहीं पहुँची।
भ्रष्टाचार की झाड़ियों में फंसी ‘नहर’
विश्वस्त सूत्रों की मानें तो नहर में पानी आए न आए, लेकिन विभाग की फाइलों में हर साल मरम्मत, सफाई और संचालन के नाम पर मोटा बजट डकारा जा रहा है।
- वर्तमान स्थिति: नहर आज झाड़ियों और मलबे के ढेर में तब्दील हो चुकी है।
- विभाग का रवैया: मुख्य अभियंता से लेकर निचले स्तर के अधिकारियों तक को कई बार शिकायती पत्र दिए गए, लेकिन विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। ऐसा प्रतीत होता है कि सिंचाई विभाग अपनी कुंभकर्णी नींद में मस्त है और किसानों का हक डकारने में व्यस्त है।
बर्बादी की कगार पर किसान
पानी के अभाव में सैकड़ों एकड़ फसल सूख कर बर्बाद हो रही है। किसान पंपसेट और अन्य महंगे साधनों के जरिए अपनी फसल बचाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं, जबकि उनकी अपनी जमीन पर बनी नहर सूखे का तमाशा देख रही है।
“हमने अपनी बेशकीमती जमीन इस आस में दी थी कि बुढ़ापे और खेती का सहारा मिलेगा, लेकिन विभाग ने हमें कहीं का नहीं छोड़ा। अब हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।”
— पीड़ित किसान, रुधौली क्षेत्र
आंदोलन की चेतावनी: डीएम कार्यालय का होगा घेराव
सिंचाई विभाग की इस घोर लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ अब किसानों का सब्र जवाब दे चुका है। क्षेत्र के किसानों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नहर की सफाई कराकर उसमें पानी नहीं छोड़ा गया, तो वे बृहद आंदोलन करेंगे। किसानों का स्पष्ट कहना है कि अब वे चुप नहीं बैठेंगे और सीधे जिलाधिकारी कार्यालय (DM Office) का घेराव कर अपनी जमीन और हक का हिसाब मांगेंगे।











